माघी मेले में लापरवाही का तांडव,आकाश झूले का लोहे का पार्टस नीचे गिरने से एक महिला व दो युवतियां गंभीर रूप से घायल,एक की हालत नाजुक

माघी मेले में लापरवाही का तांडव,आकाश झूले का लोहे का पार्टस नीचे गिरने से एक महिला व दो युवतियां गंभीर रूप से घायल,एक की हालत नाजुक

नगर पंचायत कार्यालय के ठीक सामने हुआ बड़ा हादसा,सुरक्षा इंतज़ामों पर उठे सवाल,

सुदर्शन मानिकपुरी /जांजगीर-चांपा/शिवरीनारायण

जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण में आयोजित 15 दिवसीय विशाल माघी मेले के दौरान मंगलवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया,इस घटना ने नगर पंचायत और मेला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,जानकारी के अनुसार शिवरीनारायण के नगर पंचायत कार्यालय के ठीक सामने लगे आकाश झूले का एक लोहे का पार्ट्स अचानक टूटकर नीचे गिर गया,इस हादसे में नीचे खड़ी एक महिला और दो युवतियां गंभीर रूप से घायल हो गईं घटना के बाद मेला परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया,और लोग जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे,

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक,आज शाम लगभग 4 बजे,उमेश गुप्ता द्वारा संचालित आकाश झूले की एक लोहे की पार्ट्स तकनीकी खराबी के चलते अलग होकर नीचे आ गिरी,उसी समय नीचे खड़ी एक महिला गीताबाई साहू निवासी पामगढ़ (50) और भूमिका कश्यप (23) निवासी मल्दा व चंद्रकांता कश्यप (15) निवासी बहुत, उसकी चपेट में आ गई।

हादसे की सूचना मिलते ही मेला में तैनात पुलिसकर्मियों ने बिना देरी करते हुए घायलों को एम्बुलेंस के माध्यम से शिवरीनारायण स्थित शबरी हॉस्पिटल पहुंचाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद भूमिका कश्यप के सिर में गंभीर चोट आने पर और उसकी हालत नाजुक होने पर,उसे बिलासपुर लाइफ केयर हॉस्पिटल रेफर किया गया हैं।

सुरक्षा जांच पर उठे गंभीर प्रश्न

हादसे के बाद माघी मेले में लगाए गए झूलों की सुरक्षा और फिटनेस जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं,मेला प्रारंभ होने से पूर्व झूलों की तकनीकी जांच एवं अनुमति देना नगर पंचायत सीएमओ की जिम्मेदारी मानी जाती है,इसके बावजूद इतने बड़े आयोजन में बिना पुख्ता सुरक्षा इंतज़ामों के झूलों का संचालन किया जाना स्पष्ट लापरवाही को दर्शाता हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना हैं कि मेले में कई झूले बिना मानक सुरक्षा उपायों के संचालित किए जा रहे हैं,जिसको लेकर पहले से ही आशंकाएं जताई जा रही थीं।

नगर पंचायत की भूमिका कटघरे में

हादसे का नगर पंचायत कार्यालय के सामने होना प्रशासनिक उदासीनता का सीधा प्रमाण माना जा रहा हैं,सवाल उठ रहे हैं कि क्या नगर पंचायत ने अपनी भूमिका केवल राजस्व वसूली तक सीमित कर रखी हैं,या फिर आम नागरिकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई हैं,यदि समय रहते झूलों की तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया गया होता,तो इस तरह की गंभीर घटना को टाला जा सकता था।

कार्रवाई की मांग तेज

घटना के बाद क्षेत्र में झूला संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने,मेला अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच,तथा नगर पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो गई है,फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई हैं,माघी मेले में हुआ यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आस्था और मनोरंजन से जुड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा हैं।