ट्रिपलआईटी -नया रायपुर में 21वीं ‘युवा वैज्ञानिक कांग्रेस’ का उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया शुभारंभ

अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नया रायपुर (IIIT-NR) में आयोजित 21वें छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक सम्मेलन (सीवाईएससी–2026) का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया। दो दिवसीय इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा ट्रिपलआईटी नया रायपुर द्वारा किया जा रहा है।

     उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि राज्य के विकास में विज्ञान, नवाचार और शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अपने छात्र जीवन और विज्ञान अध्ययन की यादें साझा करते हुए कहा कि विज्ञान पढ़ने से पहले मुझे अंग्रेजी पढ़नी पड़ती थी जिसके कारण कई लेक्चर मैंने छोड़ दिए पर धीरे धीरे सब सिख गया, आज जो रिसर्च पेपर आए हैं सभी अंग्रेजी में है और शायद परंपरागत शायद अंग्रेजी में ही होते हैं पर हमें अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी विज्ञान के अध्ययन और रिसर्च पेपर लाने की आवश्यकता है ताकि एक ग्रामीण परिवेश का व्यक्ति भी ज्ञान अर्जित कर सके इस पर ध्यान देना चाहिए।

    उन्होंने भारत में विज्ञान के उद्भव पर चिंतन करते हुए कहा कि विभिन्न विषयों पर भारत के मनीषियों एवं ऋषियों ने उस समय कितने चिंतन कर लिए थे जो आज भी चिंतन का विषय है। किसी एक विषय को समझने के लिए आप प्रायोगिक तरीकों से भी जा सकते हैं और वैचारिक तरीकों से भी जा सकते हैं पर आपको उस विषय को समझना है तो प्रायोगिक के साथ वैचारिक तरीकों का समावेश आवश्यक है। आर्यभट्ट जी ने जो किताब लिखी तो चार भागों में उसमें तीन सूत्र दिए जिनमें न्यूटन के तीन नियमों के संबंध में जानकारी प्राप्त हो जाती है। 

     उन्होंने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के यंग साइंटिस्ट के द्वारा प्रस्तुत किए गए 194 पेपर्स को जांचने के लिए देश भर से जो हमारे 45 परीक्षक आए हैं मैं उनका हृदय से आभार करना चाहता हूं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की सरकार ने राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित करने के लिए शोधकर्ताओं को भारत के विज्ञान तीर्थों का दर्शन कराने के लिए विज्ञान तीर्थ दर्शन योजना शुरू की जा रही है। जिसमें विज्ञान के विद्यार्थी सीवी रमन, शांति स्वरूप भटनागर, बीरबल साहनी, जगदीश चंद्र बोस, डॉ. होमी जहांगीर भाभा, विक्रम सारा भाई, सत्येंद्रनाथ बोस, हरगोविंद खुराना, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर, अबुल कलाम आजाद जैसे भारत के महान वैज्ञानिकों के कार्यस्थल को जाकर देख सकेंगें और विज्ञान के अनुसंधानों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।